शुक्रवार, 4 सितंबर 2015
उजला सा इक आसमान
सोमवार, 29 जून 2015
उन दिनों
उन दिनों कुत्ते ज्यादा भौंकते थे रातों में
प्यार के लिए
*उन दिनों कंपनियां माँ के हाथ के खाने के साथ माँ का प्यार भी डब्बो में बेचने लगी थी
और सौ रुपये में मिलती थी दो चादर
मेडिकल स्टोर से धड़ल्ले मांग लेती थे गर्भनिरोधक गोलियां
प्यार का बाजार बहुत फला फूला
और कुछ लोगो का उठने लगा भरोसा प्यार से
गुरुवार, 12 फ़रवरी 2015
बोरवेल में सच का गिरना
दुनिया कह रही थी
"बोरवेल में बच्चा गिरा है"
दुनिया अपने हाथ कमीज में छिपा कर कह रही थी
"हमारे हाथ कटे है"
दुनिया चिल्ला चिल्ला कर उस से कह रही थी
"उतरो नीचे, तुम्हारे पास कमीज नहीं"
"तुम्हारे हाथ दीखते हैं"
वो दुनिया से नही डरता था
दुनिया की परवाह नही थी
पर बच्चे के बारे में सोच कर उतरा
उसे सच्चाई पसंद थी
गहराई पसंद थी
उसे अँधेरे में रौशनी की तलाश पसंद थी
वो उतरा
बोरवेल में उतरता गया
उसे कोई बच्चा ना मिला
पर गहराई में उतरने पर उसे सच्चाई मिली
वो सोचा
दुनिया को गलतफहमी हुयी है
"कोई बच्चा नहीं गिरा है बोरवेल में"
"हाँ पर सच्चाई जरूर दफ़न है इस बोरवेल में"
वो नीचे से चिल्लाया
"यहां कोई बच्चा नहीं है"
वो चिल्लाता रहा
"यहाँ कोई बच्चा नहीं है"
उसकी आवाज टकराती और लौट आती
थक कर जब वो चुप हुआ तो,
उसे दुनिया के चिल्लाने की एक धीमी आवाज सुनाई दी
"बोरवेल में शराबी गिरा है"
भूख
टिन के फूटे कनस्तर में थोड़ा सा आटा है
पेट में बरसो पुरानी भूख है
एक लड़की चुराती है आटा
एक लड़का चुराता है भूख
टिन के उस फूटे कनस्तर में अब भी थोडा सा आटा है
पेट की भूख ने बस ख़ुदकुशी कर ली है
मैं झूठा हूँ, और खुश हूँ
मैं खुश नहीं हूँ
वजहें काफी हो सकती है खुश रहने की
एक बूढी हो चुकी किताब पे जिल्द लगाने से
मुझे मिलनी चाहिए ख़ुशी
पर इस किताब के फटते पन्नों को देख दुःख नही होता
शायद मैंने पतंगे बहुत काटी है
पतंगों की डोर से
पतंगे बनायीं भी बहुत है
किताबे फाड़ के
खुश रहने के लिए बहुत झूठ बोलना चाहता हूँ
पर सच्चाई हर पल गर्भवती हो जाती है
सच्चाई के पेट पे लात मारने के लिए हिम्मत चुराई जाती होगी कहीं
पर मैं चोर नहीं, मैं हत्यारा नहीं
हाँ पर मैं झूठा हूँ
और मैं खुश हूँ
मंगलवार, 10 फ़रवरी 2015
लापता गली, गुमशुदा लोग
गली, तीन घर के बाद लापता हो गयी
मोहल्ले के लोग गुमशुदा हो गए
एक लड़की छत पे चढ़ने के बाद कभी उतरी नही
एक लड़के ने आसमान की खुदाई शुरू कर दी
डाकिये उस शहर के पीने लगे शराब
कबूतरों के मांस के साथ
चील कबूतर बन कर आने लगे लड़कियों के छतो पर
और उनकी पायल चुराकर गायब होने लगे आसमान में
आसमान की खुदाई करने वाले लड़का
आसमान में छेद करता गया
आसमान की गहराई में उसे सबसे पहले वो गली मिली
फिर मोहल्ले के गुमशुदा लोग
फिर शहर के कबूतर
कुछ डाकिये
और आखिर में मिली वो लड़की
और एक धक्का
लड़का अब जमीन पे रहता है
और डरता है
आसमान से
डाकियों से
कबूतरों से
चीलों से
लोगो से
और उस लड़की से