तुमसे कहीं बहुत दूर
किसी गुमनाम बस्ती में
बुन रहा हूँ पलकों से
तुमसे मिलने के सपने
भेज रहा हूँ आसमान में
प्रेमपत्रों को बना के पतंग
इस उम्मीद में की
जब कटेगी पतंग
तो गिरेगी तुम्हारे छत पर
और तुम्हे दिख जायेगा मेरा चेहरा सन्देश में
मालूम हो जायेगा की मैं तुम्हे याद करता हूँ परदेस में
यकीं हो जायेगा तुम्हे की दूर हो जाने के बाद भी
प्रेम की लौ निरंतर जलती रहती है ह्रदय में
तमाम तुफानो बवंडरो को धता बताते हुए
अराहान
किसी गुमनाम बस्ती में
बुन रहा हूँ पलकों से
तुमसे मिलने के सपने
भेज रहा हूँ आसमान में
प्रेमपत्रों को बना के पतंग
इस उम्मीद में की
जब कटेगी पतंग
तो गिरेगी तुम्हारे छत पर
और तुम्हे दिख जायेगा मेरा चेहरा सन्देश में
मालूम हो जायेगा की मैं तुम्हे याद करता हूँ परदेस में
यकीं हो जायेगा तुम्हे की दूर हो जाने के बाद भी
प्रेम की लौ निरंतर जलती रहती है ह्रदय में
तमाम तुफानो बवंडरो को धता बताते हुए
अराहान
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