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सोमवार, 28 फ़रवरी 2011

जूतें

जूतें मायने रखते हैं 
उस मोची के लिए 
जिसके लिए ये रोटी कपडा और मकान है 
इसकी उपस्थिति से सार्थक इसकी छोटी सी दूकान है 

जूतें मायने रखते हैं 
उन कोमल पैरों के लिए 
जिनकी रास्ते के पत्थरों और काँटों से होती है बैर

जूतें मायने रखते हैं 
उन तमाम बेटियों वाले गरीब पिताओं के लिए 
जिम्की 'पगड़ी' बन जाती है हमराही 
उन 'दो जोड़े' जूतों की 

जूतें मायने रखते हैं 
उस नौकर के लिए 
जिसकी माँ हफ्तों से होती है बीमार 
और वो मांग बैठता है अपने मालिक से 
बीच महीने में ही अपनी अगली  पगार 

जूतें मायने रखते हैं 
उस औरत के लिए 
जिसका पति पीता है शराब 
और वो चुपचाप सहमी रहती है 
क्यूंकि उसके बोलने से टूट जाती है 
उन दो जोड़े जूतों की चुप्पी 

जूतें मायने रखते हैं 
उन तमाम 'भरतों' के लिए 
जिनके लिए अहम होता है 
राम का पुनर्वास 

जूतें मायने रखते है 
उस भिखारी के लिए 
जिसको मिल जातें है फटे पुराने जूतें 
बिना इसके मांगने पर 
और कभी खा लेते है ठोकर इन्ही जूतों से 
पेट की आग बुझाने के खातिर 

ब्रजेश सिंह