शनिवार, 22 जून 2013

स्मृतिअवशेष


समय के गर्भ में
गहराई तक धंसे हुए हैं
कुछ सुनहरे स्मृतियों के जर्जर अवशेष
जितना अन्दर जाता है वर्तमान का फावड़ा
यादों का  एक हसीं टुकड़ा निकल आता है
जिसे मैं आंसुओं से धोकर
पोंछ देता हूँ मुस्कराहट के रुमाल से
और जेब में रख लेता हूँ वो टुकडा
आगे कई वर्षों तक रोने के लिए
मुस्कुराने के लिए

अराहान 

तुम

मेरे शब्दों के मतलब में तुम हो
मेरे होने और ना होने के मतलब में तुम हो
तुम हो मेरे हर हाँ में
तुम हो मेरे हर ना में
तुम हो मेरे आज में
तुम हो मेरे कल में
तुम हो तो मैं हूँ यहाँ वहां या कहीं और
तुम हो तो मेरा है ठिकाना मेरा है ठौर
तुम हो तो गुनगुनाता हूँ
तुम्हारी बाते खुद को सुनाता हूँ
तुम हो तो मैं जिन्दा हूँ  मैं मरने के भी ख्यालों में
तुम हो तो शरबत शरबत है जिंदगी के प्यालों में
तुम हो तो ताजा ताजा से है ख्वाहिशें मेरी
तुम हो तो पुरी पुरी से है फरमाईशें  मेरी
तुम हो तो बहार है खिजा के मौसम में
तुम हो तो ठंडी ठंडी फुहार है दहकते आलम में
तुम हो तो बेचैनी को मिलती है राहत मेरी
तुम हो तो मचलती है चाहत मेरी
मैं क्या बताऊँ की मैं क्या महसूस करता हूँ तुम्हारे होने से
मैं क्या बताऊँ की मैं कितना डरता हूँ तुमको खोने से

अराहान  

धुप

धुप, धुप है
तितली नहीं
जो तुम उसे पकड़कर कैद कर लोगे अपने मुट्ठी
या फिर तोड़कर उनके पंखों को याद करोगे अपने बचपन को

धुप, धुप है
तुम्हारी प्रेमिका का पल्लू नहीं
जिसको ओढ़कर तुम डूबोगे रूमानी ख्यालों में
या फिर अपनी प्रेमिका को सुनाओगे कोई प्रेमकविता

धुप सिर्फ धुप है
ये सिर्फ जलना जानती है
चाहे धुप जाड़े की हो
या गर्मी की


हारे हुए शब्द

कवितायेँ लिखी जा सकती हैं
रात के अँधेरे में
दिन के उजाले में
शाम के धुंधलके में
कविता में शरण लेते हैं कुछ हारे हुए शब्द
उन्हें फर्क नहीं पड़ता
अँधेरे से
या
उजाले से

अरहान

दिवास्वप्न



आओ चले हम
नींद के गलीचे पर बैठकर
कहीं दूर ख्वाबों की दुनियां में
तोड़ ले पेड़ों से इन्द्रधनुष
रंग लेअपना जीवन
चुरा लें आसमान से एक टिमटिमाता सितारा
और रख लें अपने घरौंदे में, रौशन कर लेंअपना संसार
पीकर चुल्लू भर पानी प्रेम सरोवर से
मिटा लें जीवन भर की प्यास
रख दे एकदूजे के होठों पर वो सारी  बातें
जिन्हें हम हकीकत में नहीं कह पाते

अरहान 

तू समझ या ना समझ

तू समझ या ना समझ
अब सबकुछ मैं तेरी समझदारी पर छोड़ता हूँ
दुश्मनों की तादाद बढ़ रही है मेरी दुनियां में
अब सबकुछ मैं अपना तेरी यारी पर छोड़ता हूँ
चोट खाया है हमने मजबूत बनने की हर कोशिश पर
अब सबकुछ मैं अपना, अपनी लाचारी पर छोड़ता हूँ
मर्ज बढ़ता ही जा रहा है, तीमारदारों की तीमारदारी से
अब सबकुछ मैं अपना, अपनी बीमारी पर छोड़ता हूँ
लोग कहते हैं मैं बेकार होने लगा दिन-ब-दिन
अब सबकुछ मैं अपना, अपनी बेकारी पर छोड़ता हूँ
याद रखना तुम की, तुमको ही मुझे फिर से बनाना है
अब सबकुछ मैं अपना तेरी जिम्मेदारी पर छोड़ता हूँ
आंसूं छिपाने हैं मुझे बारिश में भींगकर
अब सबकुछ मैं अपना मौसम की खुशगवारी पर छोड़ता हूँ
मैं अपना सबकुछ सौंपकर तुम्हे जा रहा हूँ
देख मैं अपना अक्स तेरी चाहरदीवारी पर छोड़ता हूँ

अराहान  

यादें

जिन्दा हैं जेहन में अबतक वो  यादें
अबतक वो कहानियां
पहलु में जिनके बीता अपना बचपन, अपनी जवानियाँ
वो झांकती आँखों वाली खुली खिड़कियाँ
चाट पर टहलती मोहल्ले की लड़कियां
वो भेजना हमारा ख़त उनको
और मिटा देना सारी  निशानियाँ
जिन्दा है जेहन में अबतक वो यादें,
अब तक वो कहानियां
वो दांतों तले  ऊँगली दबाकर उसका मुस्कुराना
कागज़ के टुकड़े फेंककर प्यार जताना
वो उसके बाहीं में बीते पालो का जमाना
जैसे काँटों और फूलों का मिल जाना
याद आता है वो मंजर
याद आती हैं वो दिवानियाँ
जिन्दान है अब तक जेहन में वो यादें
अबतक वो कहानियां

अरहान