कवितायेँ लिखी जा सकती हैं
रात के अँधेरे में
दिन के उजाले में
शाम के धुंधलके में
कविता में शरण लेते हैं कुछ हारे हुए शब्द
उन्हें फर्क नहीं पड़ता
अँधेरे से
या
उजाले से
अरहान
रात के अँधेरे में
दिन के उजाले में
शाम के धुंधलके में
कविता में शरण लेते हैं कुछ हारे हुए शब्द
उन्हें फर्क नहीं पड़ता
अँधेरे से
या
उजाले से
अरहान
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