बुधवार, 18 सितंबर 2013

नन बायोडिग्रेडेबल

तुम इसे जला दो
दफना दो
फाड़ दो
या फिर पीस दो सिलबट्टे या ग्राइंडर में
ये ख़तम नहीं होगा
कायम रहेगा इसका वजूद
सदियों तक
बनकर रहेगा ये हिस्सा किसी सभ्यता का
आने वाले हजारों साल के बाद भी
मिलेंगे खुदाई में इसके अवशेष

मेरा प्यार इसी पॉलिथीन की तरह है
नन बायोडिग्रेडेबल

अराहान 

मुझे नफरत है बारिश से नोस्टालजिक हो जाने से

वो कहती है की वो बारिश देख के नोस्टालजिक हो जाती है 

पर मुझे 
याद आता है 
मेरी जेब में पड़ा दस का एक तुड़ा मुड़ा सा नोट
जो की मेरे सपनो से भी ज्यादा तुड़ा मुड़ा और बेरंग था 
पार्ले जी का वो ऐड
जिसे देखकर मुझे लगता था 
की दस रुपये भी बहुत काम के होते हैं 
मेरी मोटरसाइकिल के पंक्चर टायर 
मेरी उम्मीदों के गुब्बारे की तरह पिचके हुए थे 
मेरे कपड़ो पे कीचड़ के छींटे 
जिनके दाग अब भी है दिल पे
मिटा न सका इनको किसी के भी प्यार का सर्फ एक्सेल 
मुझे याद आता है की दाग अच्छे  नहीं होते  
मुझे तुम भी याद आती हो 
मारुती सुजुकी में बैठी 
बंद शीशे से झांकती 
भीगी बारिश में सुखी सुखी से 
मुझे देखती हुयी 
की कैसे में भीग गया 
सुखी सुखी इस बारिश में 

वो कहती है की वो बारिश देख के नोस्टालजिक हो जाती है
क्यूंकि वो अब भी देखती है बारिश 
बंद शीशे की खिड़की से 
इसलिए उसे अच्छा लगता है नोस्तालजिक हो जाना 

 मुझे नफरत है बारिश से 
नोस्टालजिक हो जाने से 
क्यूंकि अब भी काबिज है मेरे दिल पे एक दाग 
ये अलग बात है की साफ़ हो चुके हैं कपडे

अराहान 

 
 

मंगलवार, 17 सितंबर 2013

कवि


मैं लिखता था तुम्हे प्रेम पत्र
पर दे नहीं पाता  था

मैं सोचता था
क्यूंकि मैं कवि हुआ करता था
और इसलिए ये लाजिमी था की मैं सोचूं

मैं सोचूं की बादल बादल नहीं होते
बादल रेत के वो घरौंदे होते हैं
जो पानी की एक लहर से फना हो जाते है
आसमा आसमा नहीं होता
एक बड़ा सा जादुई  आईना होता है
जिसमे दिखाई देती है हमारी आकांक्षाएं
परिंदों के रूप में
इंसान इंसान नहीं होता
खिलौना होता है
भगवान् नाम के एक बच्चे का खिलौना
जो दुनिया नाम का  एक घरौंदा बनाकर
छोड़ देता हैं इंसान को खेलने के लिए


















मैं सोचता था
क्यूंकि मैं कवि हुआ करता था
मैं लिखता था तुम्हे प्रेम पत्र
पर दे नहीं पाता  था
क्यूंकि मैं सोचता था
सिर्फ सोचता था
मैं सोचता था की
मैं तुम्हे लिखूं ढेर सारे प्रेम पत्र और भूल जाऊं
और मेरी माँ बेच दे सारे ख़त कबाड़ीवाले को रद्दी समझकर
और कबाड़ी वाला बेच दे ये ख़त उस दुकानदार को
जिसके दूकान से तुम लेती हो घर का राशन
और एक दिन वो दुकानदार तुम्हे दे दे कोइ सामान
उसी प्रेमपत्र में लपेट के
और तुम्हे पता चल जाए
की तुम्हारे घर के बगल में रहनेवाले लड़के की ख़ामोशी में
बहुत प्यार है बहुत तड़प है

मैं सोचता था
की मैं एक दिन कागज पर प्रेम लिखकर
फ़ेंक दूंगा तुम्हारे घर के अहाते में
जहाँ तुम उगाती हो गुलाब के फूल
और इन्तजार करूंगा उस दिन का
जब तुम्हारे उस अहाते में उगेगा एक पौधा
जिस के हर पत्ते पर एक प्रेम पत्र लिखा होगा

मैं सोचता बहुत था
क्यूंकि मैं कवि हुआ करता था
लेकिन मैं वही सोचता था
जो  मैं सोचना चाहता था
इसलिए मैंने कभी ये नहीं सोचा था की
उस दूकान से सामान खरीदने के बाद
घर आकर तुम फेंक देती होगी वो कागज़ कूड़ा समझकर
बिना पढ़े
और
तुम्हारे घर का दरवाजा खुला होने के कारण
एक दिन चर गयी होंगी बकरियां
मेरे सारे प्रेम पत्र

मैं सोचता था
क्यूंकि मैं कवि हुआ करता था
और मैं कवि हुआ करता था
इसलिए नाकाम हुआ करता था

अराहान



सोमवार, 16 सितंबर 2013

प्रेम का रेखागणित

Photo: Mark Eaton
मेरी सीधी साधी
रेखागणितीय जिंदगी पे 
तुमने डाल दिया अपने प्यार का लम्ब 
और बाँट दिया मेरी ज़िन्दगी को 
दो बराबर हिस्सों में 
एक हिस्सा तुम्हारे प्यार में डूबा रहा 
एक हिस्सा तुम्हारे इन्तेजार में डूबा रहा 
पर तुम 
तुम जोडती रही अपने जीवन में 
नयी नयी रेखाएं 
९० डिग्री के कोण से बनी 
त्रिकोण 
त्रिकोण से चतुर्भुज 
चतुर्भुज से पंचभुज 
तुम आगे बढती रही 
पाई के मान की तरह 
और मैं तुम्हे रोकने की कोशिश में 
सफ़ेद करता रहा अपने जीवन का ब्लैकबोर्ड 

अराहान 

शुक्रवार, 6 सितंबर 2013

रात

Painting : Vincent van Gogh 
रात , 
रात का मतलब, 
सिर्फ सोना नहीं होता।  
रात का मतलब होता है 
की जागते रहो 
अगर दिल में रखते हो किसी के लिए ख़ास जगह 
गिनते रहो तारे तब तक 
जब तक थक ना जाये तुम्हारे दिमाग का कैलकुलेटर 
अपलक देखते रहो स्याह आसमान की तरफ तबतक 
जब तक ढूंढ  ना लो एक नया गृह 
जिसकी सतह पर पानी ना हो 
पर हाँ प्यार जरुर हो 
रखो सिराहने तले  अपने सारे प्रेमपत्र 
और चौकस हो जाओ इनकी पहरेदारी में 
सुनो ध्यान से झींगुरों का शोर 
पूछो उनसे रात का मतलब 
महसूस करो अपनी आँखों से 
रात का स्याह उजाला 
रात देती है जवाब सारे सवालों का 
अगर तुम जागकर करते हो सवाल 
क्यूंकि ये रात भी रात नहीं है 
ये दिन है 
जो रास्ता भटक चुकी है 
दिन भर जागते हुए 

अराहान 

शुक्रवार, 30 अगस्त 2013

रुकी हुयी एक शाम

तुम्हे पता है 
जब एक ढलती शाम 
मैंने पूछा था तुमसे 
की क्या होता है मतलब प्रेम का 
तुम्हारे चेहरे पर मासूमियत 
इठलाती हुयी बोली थी 
"प्यार का मतलब तुम,
और तुम का मतलब प्यार" 
तुम्हे पता है वो शाम अब तक नहीं ढली।  
वो शाम अब भी रुकी है वहीँ कहीं, 
नदी के किनारे, 
शहतूत के पेड़ों के पास, 
आसमान को धोखा देते हुए।   
बस हम तुम आगे बढ़ गए हैं 
अपने अपने वक़्त से बहुत  आगे 
अब बदल चूका है मतलब "तुम" का 
और प्यार का 


अराहान 

मंगलवार, 27 अगस्त 2013

लुक्का छिप्पी



रात के झीनी चादर तले , एकांत के पर्दों  के बीच, मैं जब तुम्हारे बारे में सोचता हूँ तो आस पास चमकने लगते हैं,  तुम्हारे साथ बीताये गए सुनहरे पलों के जुगनू। मैं हाथ बढ़ा कर उन्हें पकड़ने की कोशिश करता हूँ  पर हर बार की तरह मेरी मुट्ठी में जलता हुआ खालीपन ही हाथ आता है जिसकी तपिश  से मैं हर बार जल जाता हूँ. तुमसे बिछड़ने के वक़्त, जब मैं अपनी हथेलियों में तुम्हारे आँखों से झर रहे मोतियों को इक्कट्ठा कर रहा था, तब तुमने कहा था की मुझसे दूर हो जाने के बाद तुम चाँद से एक धागा लटकाओगी और मुझे खिंच लोगी। मैं रोज चाँद की तरफ एक छोटे बच्चे की तरह देखता हूँ की कोई धागा गिरेगा चाँद से।  पर अब तक चाँद से कोई धागा नहीं लटका पर हाँ चाँद से हर रोज खून टपकता है, तुम्हारे कसमों का खून, तुम्हारे किये गए वादों का खून।  तुम तो कहा करती थी की जब भी मैं तुम्हे याद करूँगा तुम सब कुछ भूल कर जहाँ भी होगी दौड़ी चली आओगी। मैं हर पल हर वक़्त तुम्हे याद करता हूँ पर तुम नहीं आती।  मुझे पता है की तुम दुनिया के किस ना किसी कोने से मुझे जरूर देखा करती होगी, मेरी खामोशियाँ सुना करती होगी। अगर ऐसा है तो तुम क्यूँ मेरे सामने नहीं आती, क्या तूम सचमुच की परी बन गयी  हो, अगर ऐसा तो फिर आ जाओ ना, परियों के पास तो जादुई छड़ी होती है. अबकी बार मैं वादा करता हूँ, कभी तुम्हारे साथ लुक्का छिप्पी का खेल नहीं खेलूँगा, और फिर कभी तुम्हे खुद से बिछड़ने नहीं दूंगा।