मंगलवार, 18 मार्च 2014

प्रेम पत्र

मेरे ह्रदय पे पड़ गयी है
तुम्हारे कोमल स्पर्श की सिलवटें
सूरज की तपिश भी
इस्त्री नहीं कर सकती इसे
मेरे हृदय पर तुमने अंकित कर दिया है
प्रेम से भी पुरानी किसी भाषा में
प्रेम से भरा एक प्रेम पत्र

अराहान

स्याह अँधेरी हैं रातें

स्याह अँधेरी हैं रातें
मिल जाए कहीं आफताब कोई

थाम के जिसका हाथ हम आगे बढ़ सके
मिल जाए ऐसा अहबाब कोई

एक शब डाल दो झोली में मेरी वस्ल की
पलकों से हम बुन लें ख्वाब कोई

मुद्दतें हुयी आँखें उनसे मिली नहीं
एक पल के लिए उसके चेहरे से हटा दे हिजाब कोई

आग ठंडी से पड़ने लगी है दिल के अंजुमन में
अपने होठों से पिला दे तेज़ाब कोई

हम सारी उम्र बिता देंगे उनके इन्तजार में अराहान
बस एक बार वो दे दे मेरे खतों का जवाब कोई

अराहान

जिद्दी लड़के

क्रांति के सिलाई मशीन पर 
सीते है वो कफ़न 
जहर उनके जीभ तले होता है 
वो जिद्दी लड़के होते हैं 
जिद्दी होते हैं उनके अरमान 

जिद्दी लड़के फाड़ सकते हैं
अपने मेट्रिक का सर्टिफिकेट
छोड़ सकते हैं अपना घर
दरवाजे पर लात मारकर
कर सकते हैं किसी से टूटके प्यार
हजम कर सकते हैं कड़वा से कड़वा सच
जिद्दी लड़के ज़माने को ठोकरों पे रखते हैं
जिद्दी लड़के नाखुनो की तरह चबाकर फ़ेंक देते हैं अपनी किस्मत
घर के कूड़ेदान में
अपनी कुण्डलियाँ जलाकर
घर से दूर कर देते है दकियानूसी कीड़े
जिद्दी लड़के
चाकुओं से हथेलियों पर किस्मत लिखते हैं
जिद्दी लड़के
जिद्दी होते हैं
कोई सिस्टम कोई कानून
उनके जिद के आगे नहीं टिकता
इसलिए जिद्दी लड़के सूली पे चढ़ाये जाते हैं
क्यूंकि वो जिद्दी होते हैं
लेकिन जिद्दी लड़के कभी मरते नहीं
सिर्फ लड़के मरते हैं
जिद्दी लड़के ज़िंदा ज़िंदा से रहते है
हिस्ट्री के टेक्स्टबुक में
या रंग बिरंगी टी-शर्टों पर
शान से घूरते हुए
मुस्कुराते हुए

अराहान

शुक्रवार, 14 मार्च 2014

एक रात

वो रात शहद थी 
जब तुम ख़ुशी ख़ुशी गिरफ्तार  थी 
मेरे बाहों के आगोश में 
लात मार कर तुमने बंद कर दिया था, रिहाई का दरवाजा 
जब पूरी दुनिया बन गयी थी वकील 
हाथ में जमानत का कागज़ लेकर 
उस रात बड़ी तेज हवा बही 
लेकिन बुझा न सकी 
तुम्हारे प्रेम कि निरंतर जलती लौ को 
तुम्हारा हाथ थाम कर 
शिखर पर चढ़ गयी, मेरी मुहब्बत कि लंगड़ी उम्मीदें 
तुमने चाँद पर लिखकर एक प्रेमपत्र 
बता दिया दुनिया को कि तुम अपने हाथ में 
बाँध चुकी हो प्रेम नामक हथकड़ी 
और हो गयी हो आजाद, खुद से, दुनिया से 
उस रात दरवाजा पिटती रही तालिबानी दुनिया 
करती रही सभ्यता संस्कृति का विधवा विलाप 
उस रात झींगुरो के रुदन के बीच 
जुगनुओं ने बताया चाँद को 
कि आसमान में लौट रहे हैं 
जमीन से जख्मी होकर दो परिंदे 
आजाद हवाओ में आजादी कि सांस लेने 

अरहान 

गुरुवार, 3 अक्टूबर 2013

हमें अच्छा लगता है रोज थोड़ा जी जी के मरना

छत से सीधा कूदकर
मरा जा सकता है
या फिर 10 ml ज़हर पीकर
ख़त्म की जा सकती है सौ ग्राम ज़िन्दगी
पर हमें
रोज थोड़ा थोड़ा मरना पसंद है
रोज थोड़ा थोड़ा दफ़न होना पसंद
हमें अच्छा  लगता है
रोज थोड़ा जी जी के मरना

अराहान 

मंगलवार, 1 अक्टूबर 2013

हीर रांझा

वो जो अभी ट्रेन छुटी है
वो तुम्हारे शहर को जाने वाली आखिरी ट्रेन थी
और किसी ने रोका भी नहीं वो ट्रेन
शायद ट्रेन में बैठी थी वो माएं,
जो अपने बेटियों को देती हैं
प्रेम ना करने की हिदायत,
स्टार प्लस के सीरियल्स देखते हुए।
सिखाती है अपनी बेटियों को सिलाई बुनाइ कढाई
आचार बनाने के तरीके
और बताती है सोलह सोमवार के व्रत के बारे में

उस ट्रेन में बैठे थे सरकारी दफ्तरों में काम करने वाले वो बाप
जिनके फिक्स्ड डिपोजिट अकाउंट में जमा होता है दहेज़ देने के लिए पैसा
और जिनके लिए दामाद का मतलब होता है सिर्फ डॉक्टर इंजिनियर और ऑफिसर
शायद इसलिए रुकी नहीं वो ट्रेन

कल तक तुम्हारे और मेरे शहर के बीच की दुरी किलोमीटर में थी
आज पता नहीं कैसे ये तब्दील हो गयी प्रकाशवर्ष में
कल तक तुम्हारे और मेरे शहर के बीच सिर्फ एक नदी थी
जिसके किनारों पर बैठकर हम दोनों गाते थे नदिया के पार फिल्म के गाने
पर ना जाने क्यूँ आज वो नदी बदल गयी है
इस ब्रह्माण्ड से भी बड़े समंदर की तरह
अब मैं समंदर की किनारे बैठकर सुन भी नहीं सकता तुम्हारे मूह से गाया हुआ
सात समंदर पार मैं तेरे पीछे पीछे आ गयी वाला गाना

दिवाली में जलाये जाते है दीये खुशियाँ मनाने के लिए
पर कभी कभी ये दिया घर भी जला देता है
दिवाली में जलाया जाता है अनार बम
धमाके के लिए नहीं
उसके इर्द गिर्द घूमकर खुशियाँ मनाने के लिए
पर कभी कभी ये हाथ में ही फट जाता है
और जला देता है
प्यार भी तो किया जाता है
खुश रहने के लिए ही ना
तो फिर क्यूँ तबाह हो जाती है
ज़िंदगिया प्यार में
अगर तुम्हे मुझसे इतना दूर ही होना था
तो फिर क्यों लिखा मेरे हाथ पे रांझा
और अपने हाथ पे हीर

हो गए ना हम दोनों भी जुदा
रांझा और हीर की तरह
अराहान

सोमवार, 30 सितंबर 2013

हैंगओवर

तुम्हे इमली खाना अच्छा लगता है
मुझे अंगूर खाना अच्छा लगा है
तुम्हारे पास इमली नहीं है
मेरे पास अंगूर नहीं है
तुम्हारे पास सिरके का एक बोतल है
मेरे पास शराब की एक बोतल है
मैं अपने बोतल से शराब पि लेता हूँ
तुम अपने बोतल का सिरका मुझे पिला देती हो
और फिर देर रात तक बिखर बिखर के टूटता है मेरा हैंगओवर
तुम्हारे आंसुओं से भींगते हुए
तुम्हारी बाहों में

अराहान