मंगलवार, 18 मार्च 2014

आग दिल में लगी रही

आग दिल में लगी रही
सीना ता उम्र जलता रहा


दूर होता रहा साहिल मुझसे 
ख्वाब दरिया का दिल में पलता रहा


उसको ही बना डाला अपना महबूब दिल ने
जिसकी नजरो में मैं हमेशा खलता रहा 


ख्वाहिश तो थी की कोई थाम ले हाथ जब भी गिरुं 
ठोकरे खाकर खुद गिरता संभलता रहा


सजदे में झुका था मैं भी खुदा के आगे
मुफलिसी का दौर यूँ ही चलता रहा 

जिस पे यकी था की साथ देगा मेरा
वो चेहरे पे चेहरा बदलता रहा

कोई तो होगा जो मेरा होगा अराहान
इसी उम्मीद में दिल ताउम्र बहलता रहा

अराहान

मधुशाला

एक ढलती शाम को 
नहीं उतार सकता मैं कॉफी के मग में 
या फिर सीने का दर्द मैं 
कम नहीं कर सकता चाय के प्याले से 
ये मेरी मज़बूरी है 
या मेरी खुद कि रजामन्दी 
कि हर उदास शाम को 
मधुशाला बुला लेती है 
और मैं ठुकरा नहीं सकता उसका न्योता

पिंटूआ - 3

चिंटूआ उ लड़की के पीछे एतना पागल आ obsessed था की दिन रात ओकरे नाम के माला जपता था। उ ससुरा बगल के नर्सरी से दू तीन दर्जन गुलाब के फूल लाता और छत के छज्जा पर बैठकर She Loves Me, She Loves Me Not कहता और साथ साथ गुलाब के फुल पूरा पंखुड़ी नोच के जियान कर देता।

वहीँ छज्जे के नीचे बैठा पिंटुआ झाड़ू निकाला आ सब फूल को समेट के उस लडकिया के देह पे फेंक दिया आ कहा की ए सुनती हो आई लभ यू । लडकियो इतना ना खुश हो गयी की उ भी कह दी आई लभ यु टू पिंटू।

बेचारा चिंटूआ आजकल दिन भर ऊहे छज्जा पर बैठकर खैनी मलता है और अपना चाइनीज मोबाइल पर फुल साउंड में बेवफाई वाला गाना सुनता है।

अच्छा सिला दिया तूने मेरे प्यार का यार ने ही लुट लिया घर यार का।




स्टेचू (Statue)

स्टेचू (Statue) 

उसे स्टेचू कह कर मुझसे जीतना अच्छा लगता था। मैं जब उसे डांटता, तो वो मुझे हंस के स्टेचू कहती, और में स्टेचू हो जाता। मैं batting करता वो बोलिंग करती, वो स्टेचू कहती मैं बोल्ड हो जाता। उसे मुझे सताना अच्छा लगता था और मुझे उसका सताना।
अब वो मेरे पास नहीं है, और मैं अब सचमुच का स्टेचू बन चूका हूँ।
मेरी निगाहें हमेशा दरवाजे पर टिकी रहती है , पता नहीं कब वो दरवाजा खोलकर अन्दर आ जाये और अपनी खनकती आवाज में कह दे 

"Okay, Satue Over. 

पिंटूआ - 2

पिंटूआ गाँव का शाहरुख़ खान था । पिंटूआ जब गाँव में घर से बाहर निकलकर कुवें के पास बैठकर अंग्रेजी अखबार पढने का दिखावा करता, तब गाँव की सारी मीना कुमारी, बैजंती माला टाइप लडकियां घर में झगडा कर के दुबारा पानी भरने जाती। और पिंटूआ के साथ ठिठोली करती।
अब पिंटूआ शहर आ चूका है, टाइम्स ऑफ़ इंडिया का वही पुराना अख़बार लेकर। यहाँ पिंटूआ को एक एंजेलिना जॉली टाइप की एक लड़की से करारा वाला इलू इलू हो गया है। उसको अपने अन्दर के शाहरुख़ खान पर भरोसा है वो जानता है की जब वो अपने लहराते बालो को हाथ से सीधा करते हुए उस लड़की को अपने दिल की बात कहेगा तो वो ना नहीं कहेगी। लड़की के आगे पीछे 15 दिन लगातार नीड फ़ॉर स्पीड खेलने के बाद पिंटूआ 16वें दिन लड़की से आख़िरकार अपने दिल की बात कह ही देता है।

"ए , सुनो, हम है ना, तुमसे परेम करते है, आई लभ यु ,और अब तुम्हारे बिना जी नहीं सकते।

"आर यू मैड?"
"आई डोंट इवन नो यू?"

पिंटूआ को ज्यादा अंग्रेजी नहीं आता था, अंग्रेजी नाम पर बस उसको आई लभ यू बोलने आता था , जो वो गाँव की सभी लडकियों को बोल चूका था पर बेचारा यहाँ मात खा गया। वो लड़की की बात नहीं समझा पर लड़की के लहजे से उसको पता लग गया की लड़की ना बोली है।

पिंटूआ सोच रहा था की आज वो किसी लड़की से नहीं , सिर्फ अंग्रेजी से हारा है।

पिंटूआ उस दिन जब घर लौटा तो उसके हाथ में रेपिडेक्स इंग्लिश स्पीकिंग कोर्स नामक किताब थी और उसके आँखों में उस एंजेलिना जॉली को पटाने के हसीं सपने।

पिंटूआ - 1

लड़की ज़ात कोमल होती है, ह्रदय से निर्मल होती है, दयालु होती है, मृदभाषी होती है, विनम्रता की मूर्ति होती है। चाहे लड़की छपरा जिला की हो या दिल्ली की, लड़की लड़की होती है। लड़की जहाँ की हो जुबान खोलेगी तो शहद ही टपकेगा।

आज से पहले तक पिंटूआ भी यही सोचता था।

पिंटूआ का भी दिल साफ़ है पर पिंटूआ के अन्दर शाहरुख़ खान और देवानंद का आत्मा ऐसा फिट है की बेचारा गड़बड़ा जाता है। 
आज वो े शाहरुख़ खान की तरह बालो पे हाथ फेरते और देवानंद की तरह हिल के, और इमरान हासमी की तरह मुस्कुराके एक क्रिस्टन स्टीवर्ट टाइप, शॉर्ट्स एवं टॉप धारिणी कन्या से टाइम पूछ बैठा।

साले, मैंने घडी की दूकान खोल रक्खी है। इस सैंडल से दो पड़ेंगे ना तो सही टाइम का तो पता नहीं तेरे बारह जरुर बजा दूंगी। चीप!!

अरे अरे भड़कती काहे हैं जी, खाली टाइमवे तो पूछे हैं।

आज पिंटूआ का लडकियों के प्रति जो उदार धारणाएं थी वो खंडित हो चुकी थी। वो अपमानित हो गया था पर अपने इस अपमान से ज्यादा वो इस बात पर परेशां हो रहा था की साला एक लड़की किसी को साला कैसे बना सकती है।


Love Ka The End

30 बार कुछ कुछ होता है, 29 बार दिल तो पागल है और 20 बार दिलवाले दुलहनिया ले जायेंगे देखने के बाद लड़के को लगा की, उसके अन्दर भी एक शाहरुख़ खान मौजूद है.  जिसके लिए भी कहीं किसी कोने में कोई सिमरन कोई अंजलि बेसब्री से उसका इन्तजार कर रही है।

लड़का घर के पिछवाड़े में रहने वाली लड़की के आगे पीछे करने लगा था । उसे यकीं था की एक दिन इस आगे पीछे करने का रिजल्ट बहुत जल्दी मिलेगा। इसी बीच लड़के ने जिद्दी आशिक नामक फिल्म देखकर ये ठाना की आज कुछ भी हो जाये लड़की को अपने प्यार का लोहा मनवा के रहेगा। लड़की को ये यकीन दिलवा के रहेगा की जिंदगी नामक इस पिक्चर में उसका हीरो वही है। लड़के के अन्दर आये इस आशिकी से लड़की भी अछूती नहीं थी। वो भी शोले की जया भादुरी की तरह बालकनी के बत्तियां बुझाने के बहाने लड़के को देख लेती पर कुछ कह नहीं पाती। पर लड़का दिन रात लड़की के ही इर्द गिर्द मंडराता। और लड़की को पूरी तरह से अपने प्यार का इजहार करने के लिए बहाने ढूंढता। जाड़े की एक रात लड़के ने फैसला लिया की वो तब तक लड़की के घर के पास खड़ा रहेगा जब तक लड़की खुद आकर उस से आई लभ यु नहीं नहीं कहेगी। जब एक किसान पूस की रात में जागकर अपने खेत की रखवाली कर सकता है और प्रेमचन्द को पूस की रात जैसी कालजयी कहानी लिखने के लिए प्रेरित कर सकता है तो वो फिर क्यों नहीं अपनी माशूका के लिये रात भर उसका इंतजार कर सकता है। लड़के ने बस एक स्वेटर और लड़की के घर से आती रौशनी के सहारे पूरी रात गुजार दी पर लड़की नहीं आई। सुबह के 8 बजे लड़की बाहर आई और लड़के को देख के मुस्कुरायी। लड़के ने राँझना फिल्म के धनुष की तरह इशारे में बताने की कोशिश की, की वो रात भर उसके लिए घर के बाहर इन्तजार करता रहा। पर लड़की शायद समझ नहीं पायी। फिर भी उसने एक कागज़ का टूकड़ा लड़के की तरफ उछाल दिया। लड़का इस कागज़ के टुकड़े को अपने तपस्या का फल समझकर खूशी से पागल हो गया पर उसकी ख़ुशी सिर्फ उतने देर तक रही जबतक उसने कागज़ के टुकड़े में लिखे सन्देश को नहीं पढ़ा था। मैसेज पढ़ते ही उसका चेहरा सफ़ेद पड़ गया।
उसकी हालत फिल्म के साइड हीरो सी हो गयी थी जो हीरोइन से चाहे कितना भी प्यार कर ले हेरोइन हमेशा मेन हीरो से ही पटती है वो भी साइड हीरो की मदद से। लड़के के साथ भी ऐसा हुआ। यहाँ वो अपनी ही बनाइ पिक्चर में साइड हीरो बन गया और उसका भाई जिसका अभी तक पिक्चर में कोई सीन ही नहीं था एकाएक मुख्य भूमिका में नजर आया। लड़की को लड़के के भाई से प्यार था। उसने लड़के से उस कागज़ के टुकड़े में इतना कहा था की वो उसके भाई से प्यार करती है और वो चाहती है की लड़का इस बात को अपने भाई को बताये।

लड़का जो अबतक अपने आप को शाहरुख़ खान समझता था एकाएक उसको अपना वजूद तुषार कपूर आफ़ताब शिवदसानी अर्शद वारसी और उदय चोपड़ा जैसा लगने लगा। लड़का रोना चाहता था पर रो ना सका। लड़के की छोटी सी लव स्टोरी का दुखद अंत हो गया था। लड़के ने सोचा था की इस लव स्टोरी में जो भी विलन बनेंगे वो उन सब को हराकर लड़की को अपना बनाएगा, अगर वो किसी अंजलि के लिए राहुल बन सकता है तो वो G.One जैसा सुपर हीरो भी बन सकता है। पर यहाँ तो कहानी ही उलटी हो गयी। लड़के हारे कदमो से घर की तरफ बढ़ रहा था। उसकी लव स्टोरी की फिल्म का आखिरी शॉट पूरा हो चुका था और उसके डायरेक्टरनुमा दिल ने भी कह दिया था Packup...........

लड़के ने इस घटना के बाद से अपने रूम में शहरुख खान के जितने भी पोस्टर थे फाड़ डाले। उसके लैपटॉप में शाहरुख़ खान के जितने भी फिल्म थे डिलीट कर डाले।

लड़का आजकल इमरान हासमी की फिलमे देखता है।