आग दिल में लगी रही
सीना ता उम्र जलता रहा
दूर होता रहा साहिल मुझसे
ख्वाब दरिया का दिल में पलता रहा
उसको ही बना डाला अपना महबूब दिल ने
जिसकी नजरो में मैं हमेशा खलता रहा
ख्वाहिश तो थी की कोई थाम ले हाथ जब भी गिरुं
ठोकरे खाकर खुद गिरता संभलता रहा
सजदे में झुका था मैं भी खुदा के आगे
मुफलिसी का दौर यूँ ही चलता रहा
जिस पे यकी था की साथ देगा मेरा
वो चेहरे पे चेहरा बदलता रहा
कोई तो होगा जो मेरा होगा अराहान
इसी उम्मीद में दिल ताउम्र बहलता रहा
अराहान
सीना ता उम्र जलता रहा
दूर होता रहा साहिल मुझसे
ख्वाब दरिया का दिल में पलता रहा
उसको ही बना डाला अपना महबूब दिल ने
जिसकी नजरो में मैं हमेशा खलता रहा
ख्वाहिश तो थी की कोई थाम ले हाथ जब भी गिरुं
ठोकरे खाकर खुद गिरता संभलता रहा
सजदे में झुका था मैं भी खुदा के आगे
मुफलिसी का दौर यूँ ही चलता रहा
जिस पे यकी था की साथ देगा मेरा
वो चेहरे पे चेहरा बदलता रहा
कोई तो होगा जो मेरा होगा अराहान
इसी उम्मीद में दिल ताउम्र बहलता रहा
अराहान