स्याह अँधेरी हैं रातें
मिल जाए कहीं आफताब कोई
थाम के जिसका हाथ हम आगे बढ़ सके
मिल जाए ऐसा अहबाब कोई
एक शब डाल दो झोली में मेरी वस्ल की
पलकों से हम बुन लें ख्वाब कोई
मुद्दतें हुयी आँखें उनसे मिली नहीं
एक पल के लिए उसके चेहरे से हटा दे हिजाब कोई
आग ठंडी से पड़ने लगी है दिल के अंजुमन में
अपने होठों से पिला दे तेज़ाब कोई
हम सारी उम्र बिता देंगे उनके इन्तजार में अराहान
बस एक बार वो दे दे मेरे खतों का जवाब कोई
अराहान
मिल जाए कहीं आफताब कोई
थाम के जिसका हाथ हम आगे बढ़ सके
मिल जाए ऐसा अहबाब कोई
एक शब डाल दो झोली में मेरी वस्ल की
पलकों से हम बुन लें ख्वाब कोई
मुद्दतें हुयी आँखें उनसे मिली नहीं
एक पल के लिए उसके चेहरे से हटा दे हिजाब कोई
आग ठंडी से पड़ने लगी है दिल के अंजुमन में
अपने होठों से पिला दे तेज़ाब कोई
हम सारी उम्र बिता देंगे उनके इन्तजार में अराहान
बस एक बार वो दे दे मेरे खतों का जवाब कोई
अराहान