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सोमवार, 28 फ़रवरी 2011

ख्वाहिशें

तन्हा, तन्हा हैं हम
तन्हा हैं ख्वाहिशें 
मंजिल- मंजिल ढूंढते फिरे 
पर मंजिल हैं 'ख्वाहिशें' 
खुला, खुला एक आसमां है ऊपर \
पर पंख हैं 'ख्वाहिशें'
जिंदा- जिंदा, दिल है
पर ज़िन्दगी है 'ख्वाहिशें'
काली काली रात है 
एक सवेरा है 'ख्वाहिशें'
इंसान- इंसान हर जगह 
पर इंसानियत हैं 'ख्वाहिशें'
मंदिर- मस्जिद हर तरफ 
पर इबादत है 'ख्वाहिशें' 

ब्रजेश सिंह