शनिवार, 22 जून 2013

इंतजार

एक बोलती आँखों और  लम्बे बालों वाली लड़की से
इश्क किया करता था
खामोश सा रहनेवाला
सहमा सहमा सा एक लड़का
लड़का, लड़की की बोलती आँखों को सुनता था
लड़की, लड़के की ख़ामोशी को पढ़ती थी
दोनों एकदुसरे को समझते थे
पर कुछ कहते नहीं थे
लड़का बस इन्तेजार में था की
एक दिन जब अँधेरा दूर होगा
एक नयी सुबह आएगी
तब वो कह देगा लड़की को अपने दिल की बात
पर उस बोलती आँखों और लम्बे बालों वाली लड़की की जुल्फें,
पल पल बढ़ रही थी
पल पल स्याह होता जा रहा था आसमान
और एक दिन सुबह के इन्तेजार में
लड़का डूब गया घुप अँधेरे में

अराहान 

तू मेरा रंग देख, मेरा मिजाज देख

तू मेरा रंग देख, मेरा मिजाज देख
मैं तुझसे इश्क करता हूँ
तू मेरा अंदाज देख
क़दमों में बिछा दिए हैं तेरे,
सारे जहाँ की खुशियाँ
शक है तो तू अपना कल देखा अपना आज देख
मैं खामोश हूँ
इसका ये मतलब नहीं की मैं बोलता नहीं
तेरे होठों पर बिखरे हैं मेरे अल्फाज देख
मत सोच की क्या होगा अंजाम मेरी मोहब्बत का
तू बस मेरे इश्क का आगाज  देख

अराहन

कबाडखाना

बहुत कुछ जमा है
मेरे दिल के कबाड़खाने में
शीशें की डिब्बियां में बंद है
मेरे सपनों के टूटे हुए कुछ  पंख
दीवार पर टंगी  हुयी हैं
हसीं यादों की केंचुलिया
रंगीन पन्नों पर कहीं बिखरी हुयी है तुम्हारी मोम  सी बातें
खिडकियों में लटका हुआ है तुम्हारी यादों का मकडजाल
पुराने पलों की मकड़ियाँ अब भी पनाह लेती हैं इनमे
जमीन पर बिखरी पडी है तुम्हारे हाथों की टूटी चूड़ियाँ
उनको अब भी आता है हुनर चुभने का
अब भी जिन्दा ज़िंदा सा है तुम्हारा नाम
उस पुराणी डायरी में
अब भी ताजे ताजे से है तुम्हारे होठों के निशाँ
उन पुराने प्यालों में
जिनमे अक्सर हम दोनों चाय पिया करते थे
अपने आने वाले कल के बारे में बात करते हुए
किसी कोने में अब भी रो रहा है
हम दोनों का "आनेवाला कल"
जिसके रोने की आवाज दबी रह जाती है
मेरे आज के क्रूर ठहाकों के बीच
मेरे दिल में कभी तैर करती थी मीठे झील की मछलियाँ
पर अब खारे पानी का शार्क रस्क किया करता है इसमें

अराहान



 

तेरी यादें



पीले पत्तों जैसी किसी उदास शाम को 
धुंध बन कर छा  जाती हैं आसमान में  तुम्हारी यादें 
साँसों में घुसपैठ करने लगता है 
तुम्हारी यादों का कड़वा धुंआ 
मैं पत्थर फेंककर आसमान में 
तितर-बितर करने की कोशिश करता हूँ 
बादलों में बने तुम्हारे अश्क को 
पर आसमान से दुबारा गिरता हुआ पत्थर 
मुझको ही चोट दे जाता है 
शायद उसको भी पसंद नहीं की 
मैं तुम्हे भूल जाऊं 

अरहान 

स्मृतिअवशेष


समय के गर्भ में
गहराई तक धंसे हुए हैं
कुछ सुनहरे स्मृतियों के जर्जर अवशेष
जितना अन्दर जाता है वर्तमान का फावड़ा
यादों का  एक हसीं टुकड़ा निकल आता है
जिसे मैं आंसुओं से धोकर
पोंछ देता हूँ मुस्कराहट के रुमाल से
और जेब में रख लेता हूँ वो टुकडा
आगे कई वर्षों तक रोने के लिए
मुस्कुराने के लिए

अराहान 

तुम

मेरे शब्दों के मतलब में तुम हो
मेरे होने और ना होने के मतलब में तुम हो
तुम हो मेरे हर हाँ में
तुम हो मेरे हर ना में
तुम हो मेरे आज में
तुम हो मेरे कल में
तुम हो तो मैं हूँ यहाँ वहां या कहीं और
तुम हो तो मेरा है ठिकाना मेरा है ठौर
तुम हो तो गुनगुनाता हूँ
तुम्हारी बाते खुद को सुनाता हूँ
तुम हो तो मैं जिन्दा हूँ  मैं मरने के भी ख्यालों में
तुम हो तो शरबत शरबत है जिंदगी के प्यालों में
तुम हो तो ताजा ताजा से है ख्वाहिशें मेरी
तुम हो तो पुरी पुरी से है फरमाईशें  मेरी
तुम हो तो बहार है खिजा के मौसम में
तुम हो तो ठंडी ठंडी फुहार है दहकते आलम में
तुम हो तो बेचैनी को मिलती है राहत मेरी
तुम हो तो मचलती है चाहत मेरी
मैं क्या बताऊँ की मैं क्या महसूस करता हूँ तुम्हारे होने से
मैं क्या बताऊँ की मैं कितना डरता हूँ तुमको खोने से

अराहान  

धुप

धुप, धुप है
तितली नहीं
जो तुम उसे पकड़कर कैद कर लोगे अपने मुट्ठी
या फिर तोड़कर उनके पंखों को याद करोगे अपने बचपन को

धुप, धुप है
तुम्हारी प्रेमिका का पल्लू नहीं
जिसको ओढ़कर तुम डूबोगे रूमानी ख्यालों में
या फिर अपनी प्रेमिका को सुनाओगे कोई प्रेमकविता

धुप सिर्फ धुप है
ये सिर्फ जलना जानती है
चाहे धुप जाड़े की हो
या गर्मी की