धुंध बन कर छा जाती हैं आसमान में तुम्हारी यादें
साँसों में घुसपैठ करने लगता है
तुम्हारी यादों का कड़वा धुंआ
मैं पत्थर फेंककर आसमान में
तितर-बितर करने की कोशिश करता हूँ
बादलों में बने तुम्हारे अश्क को
पर आसमान से दुबारा गिरता हुआ पत्थर
मुझको ही चोट दे जाता है
शायद उसको भी पसंद नहीं की
मैं तुम्हे भूल जाऊं
अरहान
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