शनिवार, 22 जून 2013

ना फिर इधर उधर जवाब की तलाश में

ना फिर इधर उधर जवाब की तलाश में
कभी खुद से भी कुछ सवाल कर

जररी नहीं हर चीज को दिमाग से तौलना
कभी कभी अपने दिल का भी इस्तेमाल  कर

चीख चीख कर करता है चैन-ओ-सुकून की बाते
पहले अपने दिल में अमन बहाल कर

चल कर ले अपना सीना छलनी सच्चाई के तीरों से
और झूठ के महलों में रहनेवालों का जीना मुहाल कर

लोग तुझे जहन्नुम से भी खिंच लेंगे अराहान
पहले तू अपने नाम का जर्रा जर्रा बेमिशाल कर

अराहान 

अच्छा लगेगा

अपने अश्कों में तुमने छिपा रखा है अपना दर्द
कभी रो भी लो अच्छा लगेगा

तुम वक़्त के हाशिये पर लिखते हो अपनी कहानी
कभी वक़्त के साथ चलकर देखो अच्छा लगेगा

तुम पूछा करते हो उनसे अपने बारे में
कभी खुद से करो सवाल, अच्छा लगेगा

कितना खोया है तुमने पाने की कोशिश में
एक दफा बिछड़ों से गले लगाकर देखो, अच्छा लगेगा

ये किसके जाने का है मातम जो संजीदा हो
भुलाकर सबकुछ मुस्कुराकर देखो, अच्छा लगेगा

ज़माने में है और भी लोग किस्मत के मारे जो जीते हैं शान से
अंदाज उनलोगों का अपनाकर देखो अच्छा लगेगा

कुछ तुमको भी है दर्द, कुछ हमको भी है अराहान
आओ हमसे अपना दर्द बाँट कर देखो, अच्छा लगेगा

अराहान

कुचक्र

किसी बीते हुए काल में
मैं ढूंढ रहा हूँ अपना भविष्य
पिरामिडों में तलाश रहा हूँ
सुनहरे पलों की ममियां
पीले पत्तों से पूछ रहा हूँ
बहारों का बसेरा
मैं समय के एक कुचक्र में बैठा हूँ
और सामने गोल गोल घूम रहा है
सोने का पिंजड़ा

अराहान 

दस साल पहले

अगर मैं अभी अठारह का नहीं होता अट्ठाईस का होता
और तुमसे दस साल पहले प्यार करता तो
शायद हम दोनों के बीच प्यार कुछ ज्यादा ही गाढ़ा होता
तब तुम मुझे हर दस मिनट पर फ़ोन नहीं करती
और ये नहीं पूछती की मैंने तुम्हारे मैसेज का रिप्लाई क्यों नहीं किया
या फिर कभी ये नहीं पूछती की कल रात मैं दो बजे किस से बात कर रहा था
दिन में सौ बार नहीं बजता मेरा फ़ोन,
तुम्हारी आवाज को मुझतक पहुँचाने के लिए
शक का मैला पानी नहीं लगा पाता  दाग हमारे मोहब्बत के दामन में
तब तुम मुझे महीने में एक बार ख़त लिखती,
आयर ये बताती की मेरे बिना तुम्हारा मन नहीं लग रहा
मिलने का वक़्त मांगती मुझसे
किस शायरी की किताब से उठाकर दो चार शायरियां लिखती
और सत्तर के दशक के किसी नायिका की तरह बिता देती सारा वक़्त
ख़त के जवाब के इंतजार में
तुम्हारे जेहन मी आती ही नहीं तब कोई बेफजूल बात
जिनसे आये दिन तुम छलनी कर देती हो मेरा सीना
आज नजदीकियां हम दोनों को दूर कर रही हैं
पर आज से दस साल पहले दूरिय हमको नजदीक रखतीं

अराहान
  

इंतजार

एक बोलती आँखों और  लम्बे बालों वाली लड़की से
इश्क किया करता था
खामोश सा रहनेवाला
सहमा सहमा सा एक लड़का
लड़का, लड़की की बोलती आँखों को सुनता था
लड़की, लड़के की ख़ामोशी को पढ़ती थी
दोनों एकदुसरे को समझते थे
पर कुछ कहते नहीं थे
लड़का बस इन्तेजार में था की
एक दिन जब अँधेरा दूर होगा
एक नयी सुबह आएगी
तब वो कह देगा लड़की को अपने दिल की बात
पर उस बोलती आँखों और लम्बे बालों वाली लड़की की जुल्फें,
पल पल बढ़ रही थी
पल पल स्याह होता जा रहा था आसमान
और एक दिन सुबह के इन्तेजार में
लड़का डूब गया घुप अँधेरे में

अराहान 

तू मेरा रंग देख, मेरा मिजाज देख

तू मेरा रंग देख, मेरा मिजाज देख
मैं तुझसे इश्क करता हूँ
तू मेरा अंदाज देख
क़दमों में बिछा दिए हैं तेरे,
सारे जहाँ की खुशियाँ
शक है तो तू अपना कल देखा अपना आज देख
मैं खामोश हूँ
इसका ये मतलब नहीं की मैं बोलता नहीं
तेरे होठों पर बिखरे हैं मेरे अल्फाज देख
मत सोच की क्या होगा अंजाम मेरी मोहब्बत का
तू बस मेरे इश्क का आगाज  देख

अराहन

कबाडखाना

बहुत कुछ जमा है
मेरे दिल के कबाड़खाने में
शीशें की डिब्बियां में बंद है
मेरे सपनों के टूटे हुए कुछ  पंख
दीवार पर टंगी  हुयी हैं
हसीं यादों की केंचुलिया
रंगीन पन्नों पर कहीं बिखरी हुयी है तुम्हारी मोम  सी बातें
खिडकियों में लटका हुआ है तुम्हारी यादों का मकडजाल
पुराने पलों की मकड़ियाँ अब भी पनाह लेती हैं इनमे
जमीन पर बिखरी पडी है तुम्हारे हाथों की टूटी चूड़ियाँ
उनको अब भी आता है हुनर चुभने का
अब भी जिन्दा ज़िंदा सा है तुम्हारा नाम
उस पुराणी डायरी में
अब भी ताजे ताजे से है तुम्हारे होठों के निशाँ
उन पुराने प्यालों में
जिनमे अक्सर हम दोनों चाय पिया करते थे
अपने आने वाले कल के बारे में बात करते हुए
किसी कोने में अब भी रो रहा है
हम दोनों का "आनेवाला कल"
जिसके रोने की आवाज दबी रह जाती है
मेरे आज के क्रूर ठहाकों के बीच
मेरे दिल में कभी तैर करती थी मीठे झील की मछलियाँ
पर अब खारे पानी का शार्क रस्क किया करता है इसमें

अराहान