अगर मैं अभी अठारह का नहीं होता अट्ठाईस का होता
और तुमसे दस साल पहले प्यार करता तो
शायद हम दोनों के बीच प्यार कुछ ज्यादा ही गाढ़ा होता
तब तुम मुझे हर दस मिनट पर फ़ोन नहीं करती
और ये नहीं पूछती की मैंने तुम्हारे मैसेज का रिप्लाई क्यों नहीं किया
या फिर कभी ये नहीं पूछती की कल रात मैं दो बजे किस से बात कर रहा था
दिन में सौ बार नहीं बजता मेरा फ़ोन,
तुम्हारी आवाज को मुझतक पहुँचाने के लिए
शक का मैला पानी नहीं लगा पाता दाग हमारे मोहब्बत के दामन में
तब तुम मुझे महीने में एक बार ख़त लिखती,
आयर ये बताती की मेरे बिना तुम्हारा मन नहीं लग रहा
मिलने का वक़्त मांगती मुझसे
किस शायरी की किताब से उठाकर दो चार शायरियां लिखती
और सत्तर के दशक के किसी नायिका की तरह बिता देती सारा वक़्त
ख़त के जवाब के इंतजार में
तुम्हारे जेहन मी आती ही नहीं तब कोई बेफजूल बात
जिनसे आये दिन तुम छलनी कर देती हो मेरा सीना
आज नजदीकियां हम दोनों को दूर कर रही हैं
पर आज से दस साल पहले दूरिय हमको नजदीक रखतीं
अराहान
और तुमसे दस साल पहले प्यार करता तो
शायद हम दोनों के बीच प्यार कुछ ज्यादा ही गाढ़ा होता
तब तुम मुझे हर दस मिनट पर फ़ोन नहीं करती
और ये नहीं पूछती की मैंने तुम्हारे मैसेज का रिप्लाई क्यों नहीं किया
या फिर कभी ये नहीं पूछती की कल रात मैं दो बजे किस से बात कर रहा था
दिन में सौ बार नहीं बजता मेरा फ़ोन,
तुम्हारी आवाज को मुझतक पहुँचाने के लिए
शक का मैला पानी नहीं लगा पाता दाग हमारे मोहब्बत के दामन में
तब तुम मुझे महीने में एक बार ख़त लिखती,
आयर ये बताती की मेरे बिना तुम्हारा मन नहीं लग रहा
मिलने का वक़्त मांगती मुझसे
किस शायरी की किताब से उठाकर दो चार शायरियां लिखती
और सत्तर के दशक के किसी नायिका की तरह बिता देती सारा वक़्त
ख़त के जवाब के इंतजार में
तुम्हारे जेहन मी आती ही नहीं तब कोई बेफजूल बात
जिनसे आये दिन तुम छलनी कर देती हो मेरा सीना
आज नजदीकियां हम दोनों को दूर कर रही हैं
पर आज से दस साल पहले दूरिय हमको नजदीक रखतीं
अराहान
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