मंगलवार, 18 मार्च 2014

पिंटूआ - 2

पिंटूआ गाँव का शाहरुख़ खान था । पिंटूआ जब गाँव में घर से बाहर निकलकर कुवें के पास बैठकर अंग्रेजी अखबार पढने का दिखावा करता, तब गाँव की सारी मीना कुमारी, बैजंती माला टाइप लडकियां घर में झगडा कर के दुबारा पानी भरने जाती। और पिंटूआ के साथ ठिठोली करती।
अब पिंटूआ शहर आ चूका है, टाइम्स ऑफ़ इंडिया का वही पुराना अख़बार लेकर। यहाँ पिंटूआ को एक एंजेलिना जॉली टाइप की एक लड़की से करारा वाला इलू इलू हो गया है। उसको अपने अन्दर के शाहरुख़ खान पर भरोसा है वो जानता है की जब वो अपने लहराते बालो को हाथ से सीधा करते हुए उस लड़की को अपने दिल की बात कहेगा तो वो ना नहीं कहेगी। लड़की के आगे पीछे 15 दिन लगातार नीड फ़ॉर स्पीड खेलने के बाद पिंटूआ 16वें दिन लड़की से आख़िरकार अपने दिल की बात कह ही देता है।

"ए , सुनो, हम है ना, तुमसे परेम करते है, आई लभ यु ,और अब तुम्हारे बिना जी नहीं सकते।

"आर यू मैड?"
"आई डोंट इवन नो यू?"

पिंटूआ को ज्यादा अंग्रेजी नहीं आता था, अंग्रेजी नाम पर बस उसको आई लभ यू बोलने आता था , जो वो गाँव की सभी लडकियों को बोल चूका था पर बेचारा यहाँ मात खा गया। वो लड़की की बात नहीं समझा पर लड़की के लहजे से उसको पता लग गया की लड़की ना बोली है।

पिंटूआ सोच रहा था की आज वो किसी लड़की से नहीं , सिर्फ अंग्रेजी से हारा है।

पिंटूआ उस दिन जब घर लौटा तो उसके हाथ में रेपिडेक्स इंग्लिश स्पीकिंग कोर्स नामक किताब थी और उसके आँखों में उस एंजेलिना जॉली को पटाने के हसीं सपने।

पिंटूआ - 1

लड़की ज़ात कोमल होती है, ह्रदय से निर्मल होती है, दयालु होती है, मृदभाषी होती है, विनम्रता की मूर्ति होती है। चाहे लड़की छपरा जिला की हो या दिल्ली की, लड़की लड़की होती है। लड़की जहाँ की हो जुबान खोलेगी तो शहद ही टपकेगा।

आज से पहले तक पिंटूआ भी यही सोचता था।

पिंटूआ का भी दिल साफ़ है पर पिंटूआ के अन्दर शाहरुख़ खान और देवानंद का आत्मा ऐसा फिट है की बेचारा गड़बड़ा जाता है। 
आज वो े शाहरुख़ खान की तरह बालो पे हाथ फेरते और देवानंद की तरह हिल के, और इमरान हासमी की तरह मुस्कुराके एक क्रिस्टन स्टीवर्ट टाइप, शॉर्ट्स एवं टॉप धारिणी कन्या से टाइम पूछ बैठा।

साले, मैंने घडी की दूकान खोल रक्खी है। इस सैंडल से दो पड़ेंगे ना तो सही टाइम का तो पता नहीं तेरे बारह जरुर बजा दूंगी। चीप!!

अरे अरे भड़कती काहे हैं जी, खाली टाइमवे तो पूछे हैं।

आज पिंटूआ का लडकियों के प्रति जो उदार धारणाएं थी वो खंडित हो चुकी थी। वो अपमानित हो गया था पर अपने इस अपमान से ज्यादा वो इस बात पर परेशां हो रहा था की साला एक लड़की किसी को साला कैसे बना सकती है।


Love Ka The End

30 बार कुछ कुछ होता है, 29 बार दिल तो पागल है और 20 बार दिलवाले दुलहनिया ले जायेंगे देखने के बाद लड़के को लगा की, उसके अन्दर भी एक शाहरुख़ खान मौजूद है.  जिसके लिए भी कहीं किसी कोने में कोई सिमरन कोई अंजलि बेसब्री से उसका इन्तजार कर रही है।

लड़का घर के पिछवाड़े में रहने वाली लड़की के आगे पीछे करने लगा था । उसे यकीं था की एक दिन इस आगे पीछे करने का रिजल्ट बहुत जल्दी मिलेगा। इसी बीच लड़के ने जिद्दी आशिक नामक फिल्म देखकर ये ठाना की आज कुछ भी हो जाये लड़की को अपने प्यार का लोहा मनवा के रहेगा। लड़की को ये यकीन दिलवा के रहेगा की जिंदगी नामक इस पिक्चर में उसका हीरो वही है। लड़के के अन्दर आये इस आशिकी से लड़की भी अछूती नहीं थी। वो भी शोले की जया भादुरी की तरह बालकनी के बत्तियां बुझाने के बहाने लड़के को देख लेती पर कुछ कह नहीं पाती। पर लड़का दिन रात लड़की के ही इर्द गिर्द मंडराता। और लड़की को पूरी तरह से अपने प्यार का इजहार करने के लिए बहाने ढूंढता। जाड़े की एक रात लड़के ने फैसला लिया की वो तब तक लड़की के घर के पास खड़ा रहेगा जब तक लड़की खुद आकर उस से आई लभ यु नहीं नहीं कहेगी। जब एक किसान पूस की रात में जागकर अपने खेत की रखवाली कर सकता है और प्रेमचन्द को पूस की रात जैसी कालजयी कहानी लिखने के लिए प्रेरित कर सकता है तो वो फिर क्यों नहीं अपनी माशूका के लिये रात भर उसका इंतजार कर सकता है। लड़के ने बस एक स्वेटर और लड़की के घर से आती रौशनी के सहारे पूरी रात गुजार दी पर लड़की नहीं आई। सुबह के 8 बजे लड़की बाहर आई और लड़के को देख के मुस्कुरायी। लड़के ने राँझना फिल्म के धनुष की तरह इशारे में बताने की कोशिश की, की वो रात भर उसके लिए घर के बाहर इन्तजार करता रहा। पर लड़की शायद समझ नहीं पायी। फिर भी उसने एक कागज़ का टूकड़ा लड़के की तरफ उछाल दिया। लड़का इस कागज़ के टुकड़े को अपने तपस्या का फल समझकर खूशी से पागल हो गया पर उसकी ख़ुशी सिर्फ उतने देर तक रही जबतक उसने कागज़ के टुकड़े में लिखे सन्देश को नहीं पढ़ा था। मैसेज पढ़ते ही उसका चेहरा सफ़ेद पड़ गया।
उसकी हालत फिल्म के साइड हीरो सी हो गयी थी जो हीरोइन से चाहे कितना भी प्यार कर ले हेरोइन हमेशा मेन हीरो से ही पटती है वो भी साइड हीरो की मदद से। लड़के के साथ भी ऐसा हुआ। यहाँ वो अपनी ही बनाइ पिक्चर में साइड हीरो बन गया और उसका भाई जिसका अभी तक पिक्चर में कोई सीन ही नहीं था एकाएक मुख्य भूमिका में नजर आया। लड़की को लड़के के भाई से प्यार था। उसने लड़के से उस कागज़ के टुकड़े में इतना कहा था की वो उसके भाई से प्यार करती है और वो चाहती है की लड़का इस बात को अपने भाई को बताये।

लड़का जो अबतक अपने आप को शाहरुख़ खान समझता था एकाएक उसको अपना वजूद तुषार कपूर आफ़ताब शिवदसानी अर्शद वारसी और उदय चोपड़ा जैसा लगने लगा। लड़का रोना चाहता था पर रो ना सका। लड़के की छोटी सी लव स्टोरी का दुखद अंत हो गया था। लड़के ने सोचा था की इस लव स्टोरी में जो भी विलन बनेंगे वो उन सब को हराकर लड़की को अपना बनाएगा, अगर वो किसी अंजलि के लिए राहुल बन सकता है तो वो G.One जैसा सुपर हीरो भी बन सकता है। पर यहाँ तो कहानी ही उलटी हो गयी। लड़के हारे कदमो से घर की तरफ बढ़ रहा था। उसकी लव स्टोरी की फिल्म का आखिरी शॉट पूरा हो चुका था और उसके डायरेक्टरनुमा दिल ने भी कह दिया था Packup...........

लड़के ने इस घटना के बाद से अपने रूम में शहरुख खान के जितने भी पोस्टर थे फाड़ डाले। उसके लैपटॉप में शाहरुख़ खान के जितने भी फिल्म थे डिलीट कर डाले।

लड़का आजकल इमरान हासमी की फिलमे देखता है।

"Take My Pen"

क्लास के उस पिछली बेंच पर
तुम्हारा नाम लिख कर
तोडा करता था मैं अपनी कलम
और उमीदों के काफिलो से गुजारिश करता
की पास आके तुम कहोगी
"Take My Pen"
पर उम्मीदे भी मेरी कलम की तरह रोज टूटती रही
और मैं कभी कुछ ना लिख पाया
तुम्हारे नाम के सिवा

अराहान

खाई

बस मेरे एक अलविदा कहने से
अगर हमारे बीच में खुद गयी है
एक गहरी खाई
तो लो आज मैं तुम्हे पुकारकर
बना देना चाहता हूँ
एक पुल
इस खाई के ऊपर
तुम्हारी दुलारती बातों के गारे से
तुम्हारे कसमों के पत्थर से
एक मजबूत पुल
जिसे तोड़ नहीं सकता किसी
भी दुनिया का बनाया हुआ
कोई भी अणु बम
एक मजबूत सा पूल
तुम्हारे हाथों में मेरे हाथ के जैसा

अरहान

प्रेम पत्र

मेरे ह्रदय पे पड़ गयी है
तुम्हारे कोमल स्पर्श की सिलवटें
सूरज की तपिश भी
इस्त्री नहीं कर सकती इसे
मेरे हृदय पर तुमने अंकित कर दिया है
प्रेम से भी पुरानी किसी भाषा में
प्रेम से भरा एक प्रेम पत्र

अराहान

स्याह अँधेरी हैं रातें

स्याह अँधेरी हैं रातें
मिल जाए कहीं आफताब कोई

थाम के जिसका हाथ हम आगे बढ़ सके
मिल जाए ऐसा अहबाब कोई

एक शब डाल दो झोली में मेरी वस्ल की
पलकों से हम बुन लें ख्वाब कोई

मुद्दतें हुयी आँखें उनसे मिली नहीं
एक पल के लिए उसके चेहरे से हटा दे हिजाब कोई

आग ठंडी से पड़ने लगी है दिल के अंजुमन में
अपने होठों से पिला दे तेज़ाब कोई

हम सारी उम्र बिता देंगे उनके इन्तजार में अराहान
बस एक बार वो दे दे मेरे खतों का जवाब कोई

अराहान