शनिवार, 22 जून 2013

पुरानी कविता

कल मैंने बेच दी अपनी एक पुरानी  कविता
जिसमे तुम थी
तुम्हारी हंसी थी
तुम्हारी पायल
तुम्हारे झुमके
तुम्हारे नखरे थे
तुम्हारी सीधी साधी
टेढ़ी मेढ़ी बातें थी
तुम्हारा रूठना था
तुम्हारा मनाना था
तुम्हारी कहानी थी
तुम्हारा अफसाना था
बेच दिया मैं कल ही इस कविता को
घर की और रद्दी चीजों के साथ
और इस तरह मैंने  सदा के लिए निकल फेंका तुम्हे
अपनी यादों से

अराहान 

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