डर
बचपन से सिखाया गया था उसे
किसी से नहीं डरना है
किसी से भी नहीं डरना है
किस हालत में नहीं डरना है
किसी हथियार से नहीं डरना है
वो निर्भीक बना
किसी से ना डरा
आगे बढ़ता रहा
फिर एक दिन उसे प्रेम हुआ
और उस दिन के बाद से वो डरने लगा
दुनिया की तमाम बड़ी छोटी चीजों से
दुनिया के तमाम उन लोगो से
जिन्होंने कभी प्यार नहीं किया
अराहान
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